रात अंधेरे में

रात अंधेरे में गर कोई ख्वाब देखो तो
बैठ जाना उठकर और दीपक जला लेना
रोशनी की लौ वो कोई गीत गाएगी
कुछ न कहना तुम बस उसको देखते रहना
स्याह पट्टे पर कलम उजली चले तो क्या मज़ा
आइना बनकर कलम काली उठा लेना

© Muntazir
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1 thought on “रात अंधेरे में

  1. माशाअल्लाह,बेहद तंज -ओ-दर्द का अहसास है आपकी नज़्म”….आइना बन कलम काली उठा लेना”।इतना दर्द आपके द़िल में कहाँ से आ गया।जरूरी समझो तो जव़ाब देने की तकलीफ़ करना।लाजवाब नज़्म है ।

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