मुस्कुराहट से

मुस्कुराहट से खुशी है
पर आंसुओं की बात है और
इन मोतियों में जो सुकून है
वो मिलता न कहीं और है

आंसू नहीं हैं ग़म के ये
ना दर्द का सैलाब हैं
ये तो रहमान अल-ग़फ़ूर से
सच्चे दिल की एक गुहार हैं

अपनी अना को छोड़कर
हाथ दुआओं में जो उठाओगे
बार एक अल-वली के सामने
सजदे में सर जो झुकाओगे

उस पाक लम्हे का सुकून
कैसे कर सकते लफ्ज़ बयां
ना शब्द न कोई हर्फ
बस बहती है अश्रु धारा

© Muntazir
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4 thoughts on “मुस्कुराहट से

  1. बेहद खूबसूरत नज़्म है जऩाब मुन्तजिर।अश़्क जो मोती से निकले सीप सी आँखों से मुस्कुराने के बाद,बन गये वो निश़ानी-ए-इब़ादत खुदा की राह में इक दव़ा सी हज़ार दर्द सहने के बाद।
    मुन्जिर का नाम राह-ए-ख़ुदा की तल़ाश में रहा मश़गूल,और अब कोई नहीं दर-ब-दर बाद तुम्हारे दुआ-ए-ख़ुदा के साये में महफ़ूज।
    ” ज़ाजाकल्लाह ख़ैर”.

  2. आपकी इस नज़्म में जो च़िनारों के पत्ते हैं कश्मीर के;
    याद दिला जाते हैं मेरी रूह़ानी मुहब्बत यक-ब-यक आके।
    श़ुक्रिया आपका।

  3. Awesome writing. I love hindi. Wish could write so beautifully

  4. Subhanallah bahut hi khubsurat alfaz hai. Aap aise post aur likha karein Khuda aur Deen se related. Jazakallah khair

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