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Poetry (Hindi-Urdu)

रात अंधेरे में

रात अंधेरे में गर कोई ख्वाब देखो तो
बैठ जाना उठकर और दीपक जला लेना
रोशनी की लौ वो कोई गीत गाएगी
कुछ न कहना तुम बस उसको देखते रहना
स्याह पट्टे पर कलम उजली चले तो क्या मज़ा
आइना बनकर कलम काली उठा लेना

© Muntazir
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