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Poetry (Hindi-Urdu)

पशेमां सी इक लड़की

पशेमां सी इक लड़की
किसी क़ब्र किनारे बैठी है
आहिस्ता आहिस्ता
बंद धड़कनों को सुनती है
तदबीरें सब खो सी गई हैं
मुनसिफ एक मुनाफ़िक़ है
सारी ज़मीं ही मक़्तल है
अब कौन यहां पर हाफिज है
दाइम कर्ब-ए-मुसलसल है
खुशियों की ख़लल है कभी-कभी
सिसकियां जनाब यहां हैं ख़ू
बरसों से दफ़्न ताइर-ए-सुकून

© Muntazir
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कैद

अदम में कैद है जो पंछी
किस रुख में उड़ चले
वो जिसकी तलाश में है
वो कहकशां कहां है
जहां अदावते न थी
उसका वो घर कहां है
वहां क़श्के लहू के हैं
कि अब ताइर उड़े कैसे
उसके पंखों‌ को जिसने काटा
वो कफ़ अपने ही थे

© Muntazir
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